शनिवार, 3 सितंबर 2011

हमारी सोच

मानव संवेदनाओं का अध्ययन करते हुए एक रिसर्च स्कॉलर ने एक बार सडक पर गिट्टी तोड़ते हुए मजदूरों से यह पूछना उचित समझा कि वे अपने काम के प्रति क्या भाव रखते है?

एक मजदूर से उसने जब पूछा, क्या कर रहे हो भाई ?

उत्तर मिला, करम में पत्थर फोड़ना लिखा था सो फोड़ रहा हूँ.

कुछ दूरी पर जाकर यही प्रश्न दूसरे मजदूर से पूछा तो उत्तर मिला, ये मेरी रोज़ी है, इसी से परिवार पालता हूँ.

और कुछ दूरी पर तीसरे मजदूर से जब यही प्रश्न पूछा गया तो वह बड़े गर्व से बोला, मैं राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रहा हूँ.

इस तरह एक ही प्रकार के कार्य के लिए लोगों में अलग-अलग सोच विद्यमान हैं, स्थायित्व इस बात पर निर्भर करता है कि उसे आप किस प्रकार ग्रहण करते हैं.

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